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27 फ़रवरी, “विश्व एन.जी.ओ. दिवस”

दान सर्वोच्च गुण है और यह वह महान माध्यम है जिसके द्वारा मानवजाति पर भगवान की कृपा होती है। — कॉनराड हिल्टन

हर वर्ष 27 फ़रवरी को “विश्व एन.जी.ओ. दिवस” मनाया जाता है। यह दिवस मुख्य रूप से सभी गैर-सरकारी और गैर-लाभकारी संस्थाओं तथा उनके पीछे कार्यरत उन लोगों को पहचानने और सम्मान देने के लिए समर्पित है, जो पूरे वर्ष समाज में योगदान देते हैं। पहला “विश्व एन.जी.ओ. दिवस” वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया गया था, जिसे बाद में औपचारिक मान्यता प्रदान की गई।

एन.जी.ओ. स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करती हैं। संयुक्त राष्ट्र चार्टर की धारा 71 के अनुसार, एन.जी.ओ. को “सरकारी प्रभाव से स्वतंत्र और लाभ के उद्देश्य से न चलने वाली किसी भी संस्था” के रूप में परिभाषित किया गया है।

चिकित्सीय सहायता, वित्तीय सेवाएं, पर्यावरणीय अनुसंधान, शैक्षणिक सहयोग तथा आपातकालीन स्थितियों में एन.जी.ओ. विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करती हैं। वे आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक सहित सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। सहयोग और नवाचार से प्रेरित होकर एन.जी.ओ. स्वयंसेवकों के माध्यम से विकसित होती हैं। साथ ही, ये संस्थाएं शहरों को रोजगार और आर्थिक लाभ भी प्रदान करती हैं।

यह दिवस कड़ी मेहनत और निःस्वार्थ सेवा पर विचार करने का अवसर देता है। वर्तमान समय में लाखों स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता समाज को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

कोरोना महामारी के दौरान, जब लॉकडाउन के समय पूरा देश शांत था, तब भी एन.जी.ओ. पूर्ण रूप से सक्रिय थीं और समाज सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रही थीं। ऐसी संस्थाएं निःस्वार्थ भाव से निरंतर लोगों की सेवा करती हैं और इस प्रकार देश के विकास में सहायक बनती हैं।

— मित्तल खेताणी
(मो. 98242 21999)

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