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दिनांक 09 अप्रैल – नवकार मंत्र दिवस

नवकार मंत्र यानी “मंत्रों का राजा”

नवकार मंत्र दिवस की शुरुआत लगभग वर्ष 2020 के बाद की गई। कोरोना काल के दौरान लोगों में मानसिक शांति, सकारात्मकता और सामूहिक प्रार्थना की आवश्यकता बढ़ने पर जैन समाज में यह विचार उत्पन्न हुआ कि नवकार मंत्र का सामूहिक जाप बड़े स्तर पर किया जाए। विभिन्न जैन साध्वियों और आध्यात्मिक नेताओं द्वारा इस विचार को आगे बढ़ाया गया और 09 अप्रैल को एक निश्चित दिन के रूप में लाखों लोगों द्वारा एक साथ नवकार मंत्र जाप की शुरुआत हुई। वर्ष 2020 के बाद से हर वर्ष 09 अप्रैल को नवकार मंत्र दिवस मनाया जाता है।

नवकार मंत्र (Namokar Mantra) जैन धर्म का सर्वोच्च और सबसे पवित्र मंत्र माना जाता है। इसे “मंत्रों का राजा” कहा जाता है क्योंकि यह आध्यात्मिक प्रगति का आधार है। इस मंत्र में किसी विशेष भगवान या व्यक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह उन सभी महान आत्माओं को नमन करता है जिन्होंने मोक्ष प्राप्त किया है या उस मार्ग पर अग्रसर हैं।

नवकार मंत्र के बारे में विशेष जानकारी:

पांच पद (पंच परमेष्ठी):
इस मंत्र में पांच पदों द्वारा पांच पवित्र आत्माओं को नमस्कार किया गया है।

• नमो अरिहंताणं: कर्मरूपी शत्रुओं का नाश करने वाले अरिहंतों को नमस्कार।
• नमो सिद्धाणं: सभी कर्मों से मुक्त सिद्धों को नमस्कार।
• नमो आयरियाणं: आचार्यों (संघ प्रमुख) को नमस्कार।
• नमो उवज्झायाणं: उपाध्यायों (शास्त्र के शिक्षक) को नमस्कार।
• नमो लोए सव्व साहूणं: संसार के सभी साधु-संतों को नमस्कार।

महत्व:

यह मंत्र किसी एक धर्म या व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं है, बल्कि आत्मिक गुणों को नमन करता है।

फल:

नवकार मंत्र का जाप करने से पापों का नाश होता है और यह सभी मंगलों में सर्वोत्तम माना जाता है।

उपयोग:

जैन धर्म के अनुयायी दैनिक पूजा, प्रार्थना तथा किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में इस मंत्र का स्मरण करते हैं। यह मंत्र व्यक्ति को सद्गुणों की ओर प्रेरित करता है। नियमित जाप से मन में शांति, सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह हमें विनम्रता, सहनशीलता और सदाचार का मार्ग सिखाता है।

जैन परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले नवकार मंत्र का उच्चारण किया जाता है। यह केवल धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक है, जो जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

सारांश:

नवकार मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक ऐसी दिव्य शक्ति है जो आत्मा को शुद्ध और मजबूत बनाती है।

— मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999)

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