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21 मार्च : विश्व वन दिवस – वृक्ष लगाओ, समृद्धि लाओ

“विश्व वन दिवस” हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। वृक्षारोपण करके, जंगलों का संरक्षण हो, पर्यावरण का संवर्धन हो और देश में समृद्धि आए—इसी उद्देश्य से इस दिन को मनाया जाता है। बढ़ते हुए शहरीकरण के कारण हम देखते हैं कि दिन-प्रतिदिन वृक्षों की संख्या कम होती जा रही है। जंगल कटते जा रहे हैं, जिससे केवल मनुष्यों को ही नहीं बल्कि वन्य जीवों को भी नुकसान हो रहा है।

यदि हम सिर्फ इतना सोचें कि कोई हमारा घर हमसे छीन ले, तो हमें कैसा लगेगा? उसी तरह जिनके पास वास्तव में रहने की व्यवस्था नहीं होती, उन्हें हम फुटपाथ या अन्य जगहों पर झोपड़ी बनाकर रहते हुए देखते हैं। उनके स्थान पर खुद को रखकर हम उनके लिए करुणा महसूस कर सकते हैं। लेकिन मनुष्य तो एक ऐसा प्राणी है जो बोल सकता है, काम कर सकता है, कमा सकता है—परंतु पशु?

हम दिन-प्रतिदिन जंगलों को काटकर पशुओं का निवास स्थान छीन रहे हैं और वे कुछ कह भी नहीं सकते। हाँ, एक बात आपने जरूर देखी होगी कि आजकल वन्य जीवों के गाँव या शहर में आने की घटनाएँ पहले से अधिक बढ़ गई हैं। इसे अक्सर कहा जाता है कि वन्य जीवों ने गाँव या शहर में घुसपैठ की है, लेकिन सच्चाई यह है कि मनुष्य ने उनके घर में घुसपैठ की है। आधुनिक विकास के नाम पर जगह-जगह बंगले, ऑफिस बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। शहर फैलते जा रहे हैं और गाँव उसमें विलीन होते जा रहे हैं। रोज नए सड़क और उद्योगों के निर्माण में असंख्य पेड़ों की बलि दी जा रही है।

पर्यावरण के संरक्षण में वृक्ष और जंगल अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) देते हैं। वृक्षारोपण केवल वर्षा ऋतु तक सीमित न रखकर अधिक से अधिक पेड़ लगाना आवश्यक है। जहाँ विद्युत तार गुजरते हों, वहाँ पेड़ नहीं लगाने चाहिए। वृक्ष हमें अनेक प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं। उनके पत्ते प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वायु को शुद्ध करते हैं। वृक्ष विभिन्न प्रकार के फल देते हैं। उनकी जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं और रेगिस्तान के विस्तार को भी रोकती हैं। कई वृक्षों की जड़ें और पत्तियाँ औषधि के रूप में उपयोगी होती हैं। कुछ वृक्षों के पत्तों से पत्तल और दोने बनाए जाते हैं। वृक्ष बादलों को ठंडा कर वर्षा लाने में सहायक होते हैं। उनकी शीतल छाया में पशु, किसान और राहगीर विश्राम करते हैं।

वृक्ष धरती की शोभा हैं। वृक्षों के बिना धरती ऐसे लगती है जैसे बिना बालों का सिर। एक पेड़ अपने 50 वर्षों के जीवन में लगभग 17.50 लाख रुपये मूल्य की ऑक्सीजन उत्पन्न करता है, 35 लाख रुपये के प्रदूषण को नियंत्रित करता है, 3 किलो कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है, 41 लाख रुपये मूल्य के पानी का पुनर्चक्रण करता है और लगभग 3% तापमान में कमी लाता है। एक वयस्क व्यक्ति द्वारा जीवन भर फैलाए गए प्रदूषण को लगभग 300 पेड़ मिलकर अवशोषित कर सकते हैं।

वन दिवस के माध्यम से वन और वन्य जीवों के प्रति सभी के मन में करुणा उत्पन्न हो तथा पर्यावरणीय संपदा की रक्षा हो, जिससे पृथ्वी पर सभी जीव सुखपूर्वक जीवन जी सकें।

वृक्षं शरणं गच्छामि।

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