TOI National CSR Summit 2026 में डॉ. वल्लभभाई काथीरिया का मुख्य संबोधन

“गौ आधारित ब्राउन रेवोल्यूशन : राष्ट्र निर्माण का मार्ग” पर दिशासूचक विचार-विमर्श
देश में कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) को राष्ट्र निर्माण के साथ अधिक सक्रिय रूप से जोड़ने के उद्देश्य से टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के टाइम्स फाउंडेशन द्वारा हाल ही में दिल्ली में TOI National CSR Summit 2026 का आयोजन किया गया। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समिट में ग्लोबल कॉन्फेडरेशन ऑफ काउ बेस्ड इंडस्ट्रीज (GCCI) के संस्थापक एवं पूर्व मंत्री डॉ. वल्लभभाई काथीरिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे और CSR के माध्यम से “गौ आधारित ब्राउन रेवोल्यूशन : राष्ट्र निर्माण का मार्ग” विषय पर विस्तृत, विचारपूर्ण और दिशासूचक मुख्य संबोधन दिया। इस समिट में भारत सरकार के मंत्रिगण, देशभर के अग्रणी उद्योगपति, CSR हेड्स, कॉर्पोरेट नेता, नीति निर्माता, सरकारी अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां तथा अंतरराष्ट्रीय विकास साझेदार उपस्थित रहे।
डॉ. काथीरिया ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि भारत की संस्कृति, अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन की आत्मा गाय से अविभाज्य रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता यह है कि विकास को केवल GDP या लाभ तक सीमित न रखकर उसे मानवता, पर्यावरण और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाले सतत मॉडल से जोड़ा जाए। इस दिशा में गौ आधारित ब्राउन रेवोल्यूशन एक समावेशी विकास मॉडल प्रस्तुत करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) अब केवल कानूनी प्रावधान या खर्च का माध्यम नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में कॉर्पोरेट जगत की सीधी भागीदारी का एक सशक्त साधन बन सकता है। यदि CSR को गौ आधारित अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, पंचगव्य, बायो-एनर्जी और ग्रामीण उद्योगों से जोड़ा जाए, तो यह देश के करोड़ों किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं के लिए जीवन परिवर्तनकारी सिद्ध हो सकता है।
डॉ. काथीरिया ने अपने संबोधन में कहा कि देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरता बनाए रखती है, बल्कि किसानों की लागत कम करके उनकी आय बढ़ाने का एक प्रभावी साधन है। पंचगव्य आधारित खाद, औषधियों और स्वास्थ्य उत्पादों के माध्यम से गांवों में स्थानीय रोजगार सृजित किया जा सकता है और पर्यावरण पर भार भी कम किया जा सकता है। गौ आधारित बायो-एनर्जी, बायोगैस और बायो-CNG परियोजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त की जा सकती है। इन क्षेत्रों में CSR के माध्यम से किया गया निवेश पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और स्वच्छ भारत के लक्ष्यों में सीधा योगदान देता है।
उन्होंने आगे कहा कि गौ आधारित लघु उद्योग जैसे गोबर आधारित उत्पाद, दीपक, धूप, खाद, हस्तकला और आयुर्वेदिक उत्पाद महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के विशाल अवसर उत्पन्न करते हैं। CSR के माध्यम से ऐसे प्रोजेक्ट्स को तकनीकी प्रशिक्षण, विपणन और वित्तीय सहायता प्रदान की जाए, तो गांवों से शहरों की ओर होने वाले पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ आधारित ब्राउन रेवोल्यूशन केवल अर्थव्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता का समन्वित दृष्टिकोण है। यह मॉडल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करता है और Viksit Bharat@2047 के विज़न को धरातल पर उतारने का व्यवहारिक मार्ग प्रदान करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि गौ आधारित ब्राउन रेवोल्यूशन केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शांति, पारस्परिक सद्भावना और सामाजिक एकता का सशक्त संदेश पूरे विश्व को देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्रांति संयुक्त राष्ट्र (UNO) द्वारा निर्धारित 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की क्षमता रखती है।
संबोधन के दौरान डॉ. वल्लभभाई काथीरिया ने बताया कि आगामी मार्च 2026 में पुणे में ग्लोबल कॉन्फेडरेशन ऑफ काउ बेस्ड इंडस्ट्रीज (GCCI) के तत्वावधान में आयोजित होने वाला Gau Tech–2026 : Cow Based Global Summit & Expo देशी गौ आधारित कृषि, प्राकृतिक खेती, पंचगव्य, गौ आधारित उद्योग, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अंतरराष्ट्रीय समिट और एक्सपो किसानों, वैज्ञानिकों, उद्योगकारों, स्टार्टअप्स और नीति निर्माताओं को एक ही मंच पर एकत्र कर गौ आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि Gau Tech–2026 गौ आधारित सतत विकास, नवाचार अनुसंधान और रोजगार सृजन के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास सिद्ध होगा।
समापन में डॉ. वल्लभभाई काथीरिया ने कॉर्पोरेट नेताओं, CSR प्रमुखों और नीति निर्माताओं से आह्वान किया कि वे अपने CSR प्रोजेक्ट्स में गौ सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्योगों को रणनीतिक प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि “जब CSR गौ आधारित विकास से जुड़ेगा, तब यह केवल समाज ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र के भविष्य को बदलने की क्षमता रखेगा।”










































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































