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पुरुलिया की गृहिणी ने घर से शुरू किया मुफ्त स्कूल, 45 बच्चों को दे रही नई दिशा

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के दूरदराज आयोध्या पहाड़ियों में रहने वाली आदिवासी गृहिणी मालती मुर्मू ने शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक पहल की है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब स्कूल बंद हो गए और ऑनलाइन शिक्षा गांवों तक नहीं पहुंच सकी, तब उन्होंने अपने घर को ही बच्चों के लिए कक्षा बना दिया।

2019 में जिलींग सेरेंग गांव में आने के बाद मालती ने देखा कि अधिकांश बच्चे शिक्षा से दूर हैं। लॉकडाउन के बाद हालात और बिगड़ गए, बच्चे पढ़ाई छोड़कर जंगलों में काम करने लगे या घर पर ही रहने लगे। इस स्थिति को बदलने के लिए मालती ने बिना किसी संसाधन के कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया।

शुरुआत में उन्हें संदेह और विरोध का सामना करना पड़ा। माता-पिता शिक्षा की अहमियत पर सवाल उठाते थे, यहां तक कि उनके परिवार ने भी उनका साथ नहीं दिया। लेकिन मालती ने हार नहीं मानी। वह घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करती रहीं और अपने छोटे बच्चे के साथ ही पढ़ाने का काम जारी रखा।

धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी और उनका घर एक छोटे स्कूल में बदल गया। आज उनके इस प्रयास से 45 से अधिक बच्चे नियमित रूप से पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से कई पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं।

मालती संताली, बंगाली और अंग्रेजी में बच्चों को पढ़ाती हैं, ताकि शिक्षा उनके लिए आसान और प्रभावी बन सके। सीमित संसाधनों के बावजूद वह कहानियों, विज्ञान और स्थानीय ज्ञान के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करती हैं।

आज उनका यह छोटा सा प्रयास पूरे गांव के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है, जहां शिक्षा अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि हकीकत बन रही है।

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