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“Adopt, Don’t Shop” का ट्रेंडक्यों भारतीय परिवार अपना रहे हैं इंडी डॉग्स ?

भारत में अब ज्यादा परिवार महंगे ब्रीड डॉग्स खरीदने की बजाय इंडी (देसी) डॉग्स को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं।
Worldwide Veterinary Service जैसे विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव न सिर्फ जानवरों की जिंदगी बचा रहा है बल्कि आवारा पशुओं की संख्या कम करने में भी मदद कर रहा है।
भारत में लगभग 6.2 करोड़ आवारा कुत्ते और 91 लाख बिल्लियाँ हैं, जिनमें से अधिकांश सड़कों पर कठिन जीवन जीते हैं। ऐसे में इंडी डॉग को गोद लेना उन्हें नया जीवन देने जैसा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंडी डॉग्स भारतीय मौसम के अनुसार ढले होते हैं, कम बीमार पड़ते हैं और उनकी देखभाल भी आसान व सस्ती होती है। वहीं, कई विदेशी नस्लें भारत के मौसम में आसानी से एडजस्ट नहीं कर पातीं। गोद लेने से पप्पी मिल्स और अनैतिक ब्रीडिंग के कारोबार को भी झटका लगता है, जहां जानवरों के साथ खराब व्यवहार किया जाता है। हालांकि, पेट अपनाना एक बड़ी जिम्मेदारी है।
“भारतीय पशु कल्याण बोर्ड” के नियमों के अनुसार, गोद लेने वाले व्यक्ति को उचित देखभाल, टीकाकरण और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। आज “गोद लें, खरीदें नहीं”सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की नई सोच बनती जा रही है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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