“22 अप्रैल विश्व पृथ्वी दिवस” प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रदूषण मुक्त धरती के लिए संकल्प

लोग प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और वायु, जल, भूमि तथा ध्वनि प्रदूषण को कम करें, इस उद्देश्य से सभी को जागरूक करने के लिए 22 अप्रैल 1970 से पृथ्वी दिवस मनाना शुरू किया गया था।
उस समय के अमेरिका के सांसद जेराल्ड नेल्सन ने पृथ्वी दिवस मनाने की शुरुआत की थी।
पानी, वनस्पति, खनिज तेल जैसे प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग के कारण आज दुनिया में पानी और शुद्ध हवा जैसे संसाधनों की कमी महसूस हो रही है पृथ्वी पर भार बढ़ गया है।
इसलिए संभवतः प्रकृति ने कोरोना महामारी जैसी स्थिति उत्पन्न की।
पृथ्वी का गुणगान और उसकी पूजा वेदों में की गई है। ऋग्वेद के अलावा अथर्ववेद के बारहवें मंडल के भूमिसूक्त में पृथ्वी की उत्पत्ति के बारे में बताया गया है।
ब्रह्मा और विश्वकर्मा जैसे देवताओं के कारण पृथ्वी प्रकट हुई। इस सूक्त के 63 मंत्रों में पृथ्वी की विशेषताओं और उसके प्रति मनुष्यों के कर्तव्यों का बोध कराया गया है।
जिस प्रकार माता अपने पुत्रों की रक्षा के लिए भोजन प्रदान करती है, उसी प्रकार पुत्रों का भी कर्तव्य है कि वे अपनी माता की रक्षा करें। जब विश्वकर्मा ने अंतरिक्ष में हवन किया, तब पृथ्वी और उसमें छिपे हुए खाद्य पदार्थ प्रकट हुए, जिससे धरती पर रहने वाले लोगों का पालन-पोषण हो सके।
अर्थात, भगवान विश्वकर्मा ने जब लोककल्याण की भावना से हवन किया, तब ब्रह्मा, विष्णु आदि देवता प्रकट हुए और सभी देवताओं की शक्तियों का अंश मिलकर एक शक्ति-पुंज बना, जो बाद में पृथ्वी के रूप में परिवर्तित हो गया। वेदों में पृथ्वी को माता माना गया है, इसलिए उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
धरती को पवित्र और माँ का रूप मानते हुए हमें उससे प्राप्त होने वाले संसाधनों को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए।
प्रदूषण और गंदगी को बढ़ने से रोकना चाहिए तथा पृथ्वी पर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए। पृथ्वी को स्वस्थ रखने के लिए बिजली बचानी चाहिए, जिससे ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति से बचा जा सके।
प्लास्टिक का उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पृथ्वी पर अत्यधिक गंदगी फैल रही है।
रासायनिक पदार्थों और उनसे बनी वस्तुओं के उपयोग से बचना चाहिए, क्योंकि उनसे पानी, हवा और मिट्टी—हर प्रकार का प्रदूषण फैलता है। इसे रोकना चाहिए और जीव हत्या को भी रोकना चाहिए।
— मित्तल खेताणी (मो. 98242 21999)

































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































