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राजकोट में भीषण गर्मी में बेजुबान जीव लाचार

हर रोज़ 100 से अधिक पक्षी हीटस्ट्रोक का शिकार: मृत्यु दर में भी 20% की वृद्धि

अप्रैल महीना अपने अंतिम चरण में है, ऐसे में सौराष्ट्र की राजधानी माने जाने वाले राजकोट में गर्मी ने अपना असली रूप दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान 40 डिग्री के पार पहुंचते ही केवल इंसान ही नहीं, बल्कि शहर के आसमान में उड़ने वाले पक्षी और सड़कों पर भटकने वाले जानवर भी गर्मी के प्रकोप से परेशान हो गए हैं।
इस समय हर दिन 100 से अधिक पक्षी हीटस्ट्रोक का शिकार बन रहे हैं, जिनमें से 20 प्रतिशत समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत का शिकार हो रहे हैं।
राजकोट में कार्यरत एनिमल हेल्पलाइन के डॉ. दीप सोजीत्रा बताते हैं कि, “इस समय हर दिन औसतन 100 के करीब पक्षी डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक के कारण अर्धमृत अवस्था में मिलते हैं। दोपहर के समय जब सूरज तेज़ होता है, तब आसमान में उड़ते पक्षी अचानक पानी की कमी के कारण जमीन पर गिर जाते हैं। शाम होते-होते हमारे पास कॉल्स की भरमार हो जाती है। लोग अपने घर की बालकनी, छत या सड़क पर पक्षियों को बेहोशी की हालत में देखते हैं। खासकर कबूतर, चिड़िया, तोता, कौआ और हुदहुद जैसे पक्षियों में यह ज्यादा देखा जा रहा है।”
वे आगे बताते हैं कि असहनीय गर्मी के कारण हीटस्ट्रोक की चपेट में आए पक्षियों पर किसी की नजर नहीं पड़ती और इलाज में दो-तीन घंटे की देरी हो जाए तो उनकी मौत हो जाती है।
फिलहाल गर्मियों में ऐसे कारणों से पक्षियों की मृत्यु दर बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि आवारा कुत्ते और गाय के बछड़े भी इस भीषण गर्मी में पानी और छांव के बिना परेशान हो रहे हैं। हीटस्ट्रोक के कारण कुत्तों के शरीर का तापमान 106 से 107 डिग्री तक पहुंच जाता है। गंभीर मामलों में कुत्तों को दो से तीन दिन तक लगातार ड्रिप चढ़ानी पड़ती है।
जीवदया कार्यकर्ता प्रतीकभाई संघाणी कहते हैं कि इस भीषण गर्मी में पानी और छांव की कमी के कारण बेजुबान जीव अपनी जान गंवा रहे हैं। लोगों से अपील है कि वे अपने घर के बाहर या छत पर पक्षियों के लिए पानी के बर्तन जरूर रखें। कुत्तों के लिए छांव की व्यवस्था करें और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराएं। यदि कोई पक्षी या जानवर असहाय दिखाई दे, तो तुरंत एनिमल हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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