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“कचरे से बनाए आशियाने: अशोक तेवानी की गौरैया बचाने की मुिहम”

कभी हर घर की बालकनी और आंगन में चहचहाने वाली गौरैया आज शहरों से धीरे-धीरे गायब होती जा रही है। लेकिन नागपुर के 74 वर्षीय अशोक तेवानी ने ठान लिया कि वे इन नन्हीं चिड़ियों के लिए फिर से घर बनाएंगे।
बैंक ऑफ इंडिया से 2012 में रिटायर होने के बाद, उन्होंने 2014 में गौरैयों की घटती संख्या पर एक लेख पढ़ा। उसी दिन उन्होंने फैसला किया कि वे उनके लिए सुरक्षित घोंसले बनाएंगे।
उन्होंने पुराने कार्डबोर्ड बॉक्स, शादी के कार्ड्स और बेकार सामान से छोटे-छोटे घर बनाना शुरू किया। पिछले कई सालों से वह हर दिन कम से कम 1 घोंसला बना रहे हैं। उनके बनाए कुछ घोंसले डबल और ट्रिपल स्टोरी भी होते हैं, जिनमें 10 तक एंट्री होल्स होते हैं और जो 7-8 साल तक चल सकते हैं। पहले वह ये घोंसले मुफ्त में बांटते थे, लेकिन जब लोगों ने उन्हें सजावट की चीज़ की तरह इस्तेमाल करना शुरू
किया, तो उन्होंने सिर्फ ₹40 की छोटी-सी कीमत रखी ताकि लोग उनकी अहमियत समझें। अशोक जी बताते हैं कि जब उन्होंने पहला घोंसला लगाया था, तो सिर्फ 2 दिनों में एक गौरैया का जोड़ा उसमें तिनके लेकर रहने आ गया। वही पल उनके लिए सबसे बड़ी खुशी बन गया।
जहाँ लोग कचरे में सिर्फ बेकार चीजें देखते हैं, वहीं अशोक तेवानी उन्हीं चीजों से नन्हीं ज़िंदगियों के लिए आशियाना बना रहे हैं। उनकी कहानी याद दिलाती है कि दुनिया बदलने के लिए हमेशा बड़े कदम नहीं, कभी-कभी एक छोटा-सा घोंसला भी काफी होता है।

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