7 मई, “वर्ल्ड एथलेटिक्स डे” खेलकूद स्वास्थ्य की कुंजी है
“एथलेटिक्स डे” मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2003 में ‘वर्ल्डवाइड न्यूबी एथलेटिक फेडरेशन’ द्वारा की गई थी। वर्तमान समय में बच्चे मोबाइल के पीछे अधिक आकर्षित हो गए हैं। एक समय था जब बच्चे सड़कों पर कबड्डी, खो-खो, डब्बा आइस-पाइस, गिल्ली-डंडा, लंगड़ी जैसी खेलें खेलते थे, लेकिन आज ये खेल तो हैं, पर सड़कों पर बच्चों की भीड़ नहीं दिखाई देती। ऐसा नहीं है कि बच्चे ये खेल आज नहीं खेलते, बल्कि वे इनके अलावा कई अन्य खेल भी खेलते हैं, लेकिन मोबाइल में खेलते हैं—यही एक बड़ा प्रश्न है।
शारीरिक श्रम करना, पसीना बहाना, दौड़-भाग करना—मानो आजकल के बच्चों को पसंद ही नहीं है। गली के बाहर चौक तक जाने के लिए भी वे माता-पिता से वाहन में छोड़ने को कहते हैं, इतना भी चलना उन्हें कठिन लगता है। यहां बड़ा सवाल यह है कि माता-पिता भी बच्चों की जिद के आगे झुक जाते हैं और उन्हें शारीरिक श्रम करने से रोकते हैं। कुछ माता-पिता तो यह सोचकर कि क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस या कबड्डी खेलकर बच्चा क्या कर लेगा, उस पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव डालते हैं।
लोगों के जीवन से खेल दूर हो गए हैं, जिसके कारण खेल भावना भी वे सीख नहीं पा रहे हैं। एक ओर नीरज चोपड़ा, पीवी सिंधु, रवि कुमार दहिया, मीराबाई चानू जैसे खिलाड़ी देश के लिए ओलंपिक में जाकर विभिन्न पदक जीत रहे हैं, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी का खेलों में रुचि कम होती जा रही है। कई बच्चे ऐसे भी हैं जो खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें माता-पिता का सहयोग नहीं मिल पाता।
इस दिशा में लोगों को सचमुच जागरूक होने की आवश्यकता है। सरकार को भी खेल क्षेत्र में नई योजनाएं बनाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। खेलकूद न केवल शरीर को बल्कि मन को भी स्वस्थ रखता है। इससे स्वास्थ्य पूरी तरह से बेहतर बना रहता है। वर्तमान समय में मोटापे से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं, ऐसे में खेलकूद के माध्यम से स्वास्थ्य और फिटनेस के प्रति जागरूकता लाना आवश्यक है।
इसके लिए कुछ प्रयास किए जा सकते हैं, जैसे—स्कूल और कॉलेजों में खेलकूद को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित करना, नियमित खेलकूद के व्याख्यान आयोजित करना, विभिन्न खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार और संस्थाओं द्वारा कैंप आयोजित करना, तथा जो बच्चे इस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए योजनाएं बनाना। इससे देश का भविष्य उज्ज्वल बन सकता है।
मित्तल खेतानी (मो. 98242 21999)












































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































